रोमिंग जर्नलिस्ट

गुरुवार, 26 मई 2011

घायल मन की व्यथा-कथा

रोमिंग जर्नलिस्ट की रिपोर्ट 11
जाहिरा बोली मैं लगातार फाटक पीटने के साथ अल्ला के नाम पर रहम करने की भीख मांग रही थी लेकिन साहब उन जुल्मियों ने एक भी ना सुनी बल्कि जाते-जाते धमकी दे गए कि अगर किसी को इसकी इत्तला दी तो तुम्हारी और तुम्हारे परिवार की खैर नहीं। साहब मेरी फूल जैसी बेटी की हालत बिगड़ गयी लेकिन परिवार की सलामती के लिए किसी को इत्तला नहीं दी। रेशमा बेटी(गर्वमेंट मेडिकल कालेज जम्मू में नर्स) ने हिम्मत बंधाते हुए शिकायत करने को कहा ताकि किसी और फिरदौस की इज्जत तार-तार न हो। जाहिरा की दर्द भरी बातों को सुनने के बाद एक नजर फिरदौस की तरफ डाली। सुर्ख लाल चेहरे पर अरमानों की कब्र खुदी साफ दिख रही थी तो उसके सिले होंठ मानों जुर्म की वहीं दास्ता बयां कर रहे थे। जिस मां की बेटी की इज्जत तार-तार हो गयी हो वह किसी और की बेटी के साथ ऐसा जुल्म न हो इसके लिए जिस साहस का परिचय दिया उसे देखकर उस मां को दिल से प्रणाम करने से खुद को रोक नहीं सका। फिरदौस को देखकर दिमाग में डिंपल कपाडिय़ा की अरसे पहले आयी फिल्म ‘जख्मी औरत’ की रील दिमाग के परदे पर चलने लगी। इस फिल्म में जिस तरह डिंपल कपाडिय़ा ने बलात्कारियों को सजा दी थी, काश उसी तर्ज पर फिरदौस भी सजा दे सकती। दिमाग में आए इस विचार को दफन करके फिरदौस की ओर मुखातिब होकर हिम्मत से काम लो, खुदा तुम्हारी मदद करेगा। इससे ज्यादा कुछ नहीं बोल पाया। जाहिरा को वूमेन कमीशन के दफ्तर जाने के साथ जुमे को यह मामला पहुंच जाने का आश्वासन देने के साथ भरोसा जताया कि इंशाअल्लाह वहां से कुछ न कुछ मदद जरूर मिलेगी। पंद्रह मिनट फिरदौस और उसकी मां के साथ गुजारने के बाद मन बहुत भारी हो गया था। सोचने लगा कि जिस जमीं को जन्नत कहा जाता है, वहां जुल्म की ऐसी कितनी दास्तानें जमींदोज होंगी। मेडिकल कालेज से चलते वक्त रेशमा ने फिर चाय का अनुरोध किया लेकिन उसको विनम्रता के साथ अस्वीकार करते हुए कहा आफिस पहुंचने में देर हो जाएगी। आधे घंटे के भीतर सिटी बस से विक्रम चौक पहुंचने के बाद आफिस पहुंच गया, तब तक संपादक जी नहीं आए थे। आफिस के नीचे मौजूद चाय की दुकान पर एक कप चाय पीकर मूड हल्का करने में जुट गया। चाय की चुस्की संग फिरदौस के बारे में सोचता रहा। चाय खत्म होने के बाद तवी नदी की ओर कदम स्वत: बढ़ गए। तवी से अपना जम्मू आने के बाद जो रिश्ता बंधा वह अटूट है। जब भी दिल,दिमाग भारी रहता तो तवी के किनारे आने पर जो सुकून मिलता है, उसको शब्दों में नहीं बयां किया जा सकता सिर्फ महसूस किया जा सकता है। पत्थरों से टकराते हुए बहती तवी की धारा को देखकर ऐसा लगता है जम्मू-कश्मीर में चरमपंथियों के चलते आम लोगों की जिंदगी भी ऐसे ही चल रही है। कभी तवी की अठखेलियां तो कभी उसके किनारे खेलते बच्चों को देखते हुए घड़ी पर नजर डाली तो आफिस पहुंचने का समय हो गया था, तुरंत उल्टे पांव चल पड़ा। 
संपादक जी अपने चैंबर में बैठकर ई-मेल चेक कर रहे थे, शीशे के चैंबर के बाहर से ही उनको सिर झुकाकर प्रणाम किया। संपादक के चैंबर के बगल में मौजूद अपने केबिन में आराम की मुद्रा में बैठने के साथ कम्प्यूटर आन कर दिया। अभी ई-मेल ही चेक कर रहा था कि बंटी सरदार आकर बोला संपादक जी ने बुलाया है। यह बंटी सरदार भी अपना यार बन गया था। पंजाब का रहने वाले सोलह साल के बंटी से पहली मुलाकात जम्मू रेलवे स्टेशन पर तब हुई थी जब वह प्लेटफार्म पर अखबार बेच रहा था। काशी से कश्मीर पहुंचने के बाद अमरउजाला जम्मू के दफ्तर का पता प्रिंटलाइन में देखने के लिए जब अखबार खरीदा और फ्रंट पेज की जगह आखिरी पेज पर प्रिंट लाइन देखने लगा तो वह एकबारगी चौकते हुए उसने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा। खैर बंटी सरदार के साथ अपने याराने के कई रोचक किस्से आगे बताएंगे। अभी चलते हैं सपांदक जी के चैंबर में। आओ ....दिनेश आज क्या रहा? दिनभर की भागदौड़ का किस्सा बताने के साथ डोगरी डे को लेकर विशेष आयोजन करने का प्लान बताया। यह प्लान संपादक जी को अच्छा लगा। बोले इसका ब्लू प्रिंट बनाओ। आज क्या खबर है? बोले सर आज तो हाथ में इस आइडिया के अलावा कोई खबर पकी नहीं है। फिरदौस से मिलने का किस्सा भी बताया बोले, यहां ऐसे मामले में कोई भी अखबार या चैनल तब तक हाथ नहीं डालते हैं, जब तक कोई सरकारी महकमा इसको संज्ञान में नहीं लेता है। फिरदौस पर आतंकवादियों ने किस कदर जुल्म ढाया, इसका जिक्र सुनकर उनका भी खून खोल उठा। जम्मू-कश्मीर में परिवार के साथ रहे प्रमोद भारद्वाज के चेहरे पर सिस्टम को लेकर पहली बार गुस्सा दिखा। साथ में अखबार में रहकर भी कुछ न कर पाने की बेचारगी भी झलकी, लेकिन अच्छा लगा। वूमेन कमीशन में यह मामला जाने के बाद इसको लेकर स्टोरी करने की बात कहते हुए कहा कि आज सिटी की जो खबरें हैं उनको ध्यान से पढऩा। कई खबरों को तुम्हे दुबारा लिखना भी पड़ सकता है। संपादक के चैंबर से निकलते ही चीफ सब एडीटर योगेश शर्मा पूछ पड़े.. और गुरु आज क्या मसाला लाए हो? बोला भाई आज मसाला तो दूर नमक-मिर्च भी नहीं है। अपने केबिन में आकर बैठा ही था कि एक फोन आया। मैने  सोचा यहां मुझे कौन याद करेगा? खैर फोन हाथ में लेकर हैलो.. बोला तो उधर से आवाज आयी दिनेश चंद्र मिश्र जी बोल रहे हैं क्या? मैं बोला हां भाई। अपना परिचय देते हुए बोले भाई आपकी कई खबर पढऩे को मिली इसलिए अपने को रोक नहीं सका। मेरा नाम आरसी शर्मा, मैं लखनऊ का रहने वाला हूं। यहां वन विभाग में डीएफओ हूं। शर्मा जी सुनते ही दिल बाग-बाग हो गया, खबर का ऐसा रिस्पांस पहली बार यहां देखने को मिला। काशी से कश्मीर तक आने की कहानी के बाद शर्मा जी के साथ कल चाय पीने का वादा करके फोन रख दिया। फोन रखने के साथ ही दिमाग में वन विभाग में खबरों की पैदावार शर्मा जी के सहारे कितनी की जा सकती है? इसकी संभावनाओं पर दिमाग में सोच के घोड़े दौडऩे लगे। इंतजार था कल का ताकि जम्मू संभाग के वन अधिकारी आरसी शर्मा जी से मुलाकात और खबरों की बात आगे बढ़े।
क्रमश:

7 टिप्‍पणियां:

ANAMIKA ने कहा…

zahira jaisa dard kashmir ki hindu aurutao ne bhaut bhoga hai, kashmir mai jis tarah mutthi bhar log julam dhhate hai. uske peeche karan congress ki votebank jaisi gandi soch hai. mutthi bhar logo ko pathar fekane per paisa aur kisone ko ja...meen na dene per goli. yeh natwaoo ki ghinuoni chal hai. zahira ka dard padkar dil rone laga.j&k mai article 370 dekar nehru ne jo galti ki usski saza tab tak hum bhogenge jab tak usko hatyaa nahi jata hai.

ANAMIKA ने कहा…

zahira jaisa dard kashmir ki hindu aurutao ne bhaut bhoga hai, kashmir mai jis tarah mutthi bhar log julam dhhate hai. uske peeche karan congress ki votebank jaisi gandi soch hai. mutthi bhar logo ko pathar fekane per paisa aur kisone ko ja...meen na dene per goli. yeh natwaoo ki ghinuoni chal hai. zahira ka dard padkar dil rone laga.j&k mai article 370 dekar nehru ne jo galti ki usski saza tab tak hum bhogenge jab tak usko hatyaa nahi jata hai.

बेनामी ने कहा…

zahira jaisa dard kashmir ki hindu aurutao ne bhaut bhoga hai, kashmir mai jis tarah mutthi bhar log julam dhhate hai. uske peeche karan congress ki votebank jaisi gandi soch hai. mutthi bhar logo ko pathar fekane per paisa aur kisone ko ja...meen na dene per goli. yeh natwaoo ki ghinuoni chal hai. zahira ka dard padkar dil rone laga.j&k mai article 370 dekar nehru ne jo galti ki usski saza tab tak hum bhogenge jab tak usko hatyaa nahi jata hai.

PRITI ने कहा…

"jo bhi abhaw bharana hoga ,chalte chalte bhar jaega ,path me gunane baithoonga to ,jeena doobhar ho jaega "{shiv mangal singh suman}. yatra anvarat jari hai . ham sabh apke nit nae anubhavon se labhanvit ho rahe hain . har baar ek nai kahani ek naya addhyaay , ek naya utsaah aur saath hi" kuchh hat ke kar guzarane ka zazba" ye aapki bheed se alag pahachaan banata hai .ishawr aapki madad kare .hardik shubh kaamnaaen !!

PRITI ने कहा…

"jo bhi abhaw bharna hoga chalte chalte bhar jaega ,path me gunane baithoonga to jeena doobhar ho jaega"{shiv manga singh suman}YAATRA ANVARAT JARI HAI !! aapke nit naye anubhavon se ham bhi laabhanvit ho rahe hain , har baar ek nai kahani ,ek naya sabak . kuchh hat kar karne ka aapka zazba aapko bheed se alag pachaan deta hai . is zazbe ko yun hi qayam rakhiyega . BEST WISHES

PRITI ने कहा…

"jo bhi abhaw bharna hoga ,chalt chalte bhar jaega ,path me gunane baithoonga to jeena doobhar ho jaega ." YATRA ANWARAT JARI HAI !! NIT NAYI KAHANI ,NAYA SABAK SATH HI KUCHH KAR GUZARNE KI CHAAH AAPKO BHEED SE ALAG KARTI HAI .DOOSARON KI MADAD KA HAUSALA ADBHUT HAI . DEKHATE HAIN AAGE KYA HOTA HAI . MY ALL GOOD WISHES !!

PRITI ने कहा…

"jo bhi abhaw bharna hoga chalte chalte bhar jaega ,path me gunane baithoonga to jeena doobhar ho jaega ".YATRA ANVARAT JARI HAI !! NIT NAYE ANUBHAVON SE HAM BHI LABHANVIT HO RAHE HAIN .YE JO AAP KE ANDER "KUCHH HAT KE KARNE"KA ZAZBA HAI YE AAPKO BHEED SE ALAG PAHACHAAN DETA HAI .DOOSRON KI MADAD KARNE KA YE HAUSALA AAPME YUN HI QAYAM RAHE !!AAMIN !!

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