रोमिंग जर्नलिस्ट

शुक्रवार, 1 जुलाई 2011

पाक औरतों में बच्चे से ज्यादा जेहाद से प्यार


‘हाफीजा ने फाड़ डाले पाक डायरी के पन्ने’! बेनजीर भुटटो की मौत के मातम में जम्मू कश्मीर वूमेन कमीशन की सेक्रेटरी से जुड़ी यह खबर हिट रही। डायरी के पन्ने भले ही फट गए थे लेकिन उसकी तमाम बातें अब भी जेहन में ताजा थी। पाकिस्तान की नापाक हरकतों की चर्चा तो तमाम लोग करते हैं लेकिन आंखोंदेखी जो हाफीजा ने सुनायी, वह जानकार पाक से और नफरत होना लाजिमी है। अमन का संदेश लेकर लाहौर पहुंची भारतीय महिलाओं के दल ने तीसरे दिन वहां के बाजार में घूमने के साथ खरीदारी करने का प्लान बनाया। हाफीजा कुछ महिलाओं के साथ सलवार सूट खरीदने के लिए लाहौर की एक मशहूर बाजार में पहुंच गयी । अफगानी,पटियाला सूट से सजे इन दुकानों पर खरीदारी के पहले बारगेनिंग गजब की दिखी। दो-तीन सूट खरीदने के बाद हाफीजा जब होटल लौट रही थी तो अचानक उनकी निगाह एक महिला पर पड़ी जो दस-बारह साल के बच्चे को लेकर शापिंग करने आयी थी। मां के साथ शापिंग के लिए आया बच्चा आइसक्रीम का ठेला देखकर लेने की जिद करने लगा तो वह उसका हाथ पकडक़र आगे खींचती रही। महिला के हाथ में कुछ छुटटे पैसे थे, बच्चा उसको लेकर आइसक्रीम खरीदना चाह रहा था, लेकिन वह औरत बच्चों की जिद को दरकिनार करके आगे बढ़ती रही। एक दुकान पर कुछ सामान खरीदने के बाद काउंटर पर रखे एक डिब्बे में छुटटे पैसे डाल दिए तो बच्चा जोर-जोर से रोने लगा। हाफीजा का दिमाग ठनक गया। मां की यह कैसी ममता? बेटे को आइसक्रीम खिलाने की बजाए चिल्लर डिब्बे में डाल दिए। हाफीजा ने उस डिब्बे पर उर्दू में कुछ लिखा देखा तो नजदीक पहुंच गयी। डिब्बे पर तालिबानी जेहाद के लिए जकात देने की बात लिखी गयी थी। जेहाद की बातों को लिखा देखकर हाफीजा का माथा ठनक गया। हिंदुस्तान जिस आतंकवाद का दंश झेल रहा है, उसको बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान के बाजार में चंदा इक्ïठा करने के लिए दुकानों पर डिब्बा देखकर चौंक गयी। शापिंग कर चुकी हाफीजा खोजी पत्रकार के नजरिए से बाजार में घूमी तो हर दुकान पर तालिबान को चंदा देने के लिए रखे गए डिब्बे को देखकर उनको बहुत कोफ्त हुआ। कोफ्त इस बात का था जिस पाकिस्तान में अमन का संदेश लेकर वह आयी हैं, वहां हिंदुस्तान में आतंकवाद फैलाने के लिए जिस तरीके से तालिबान लोगों से चंदा वसूल रहा है, उससे लोगों की मानसिकता में क्या फर्क आएगा? खरीदारी करने के बाद होटल लौटकर यह बात हाफीजा ने निर्मला देशपाण्डेय को बतायी। इसे सुनकर वह भी दुखी होते हुए बोली यहां अमन तब तक नहीं आ सकता है जब तक लोगों की हिंदुस्तान को परेशान करने की जेहनियत नहीं बदलेगी। लाहौर,रावलपिंडी सहित पाकिस्तान के कई इलाकों में हाफीजा घूमने गयी तो वहां उसकी नजरों को जकात के नाम पर जेहाद के लिए धन एकत्र करने के लिए रखे डिब्बों को खोजने में देर नहीं लगी। ऐसे ही एक बाजार में एक महिला को जेहाद के लिए रखे डिब्बे में पैसा डालते हुए देखकर हाफीजा अपने आप को नहीं रोक सकी। उन्होंने उससे पूछा कि जेहाद का मतलब वह क्या जानती है? उसका जवाब था इस डिब्बे में कुछ न डालने पर जान का खतरा रहता है। पाकिस्तान में हिंदुस्तान के खिलाफ दुकान-दुकान पर जेहाद के लिए चंदे एकत्र होने की बात देखकर हाफीजा का माथा ठनक गया। पाकिस्तान से हिंदुस्तान आने के बाद अपने शौहर को पूरी बात बतायी तो मियां ने कहा कि यह बात कहीं कहना नहीं। हम लोग जहां रहते हैं, वहां दिल की बात कहने से पहले सौ बार सोचना पड़ता है। इसलिए यह बात किसी से मत कहना। बेनजीर भु्टटो की मौत के बाद हाफीजा ने पाक डायरी के जो पन्ने फाड़े थे,उसमें तीन पन्ने पाकिस्तान में जेहाद के लिए एकत्र हो रहे तथाकथित जकात पर भी थे। पाक डायरी के पन्नों को फाडऩे की स्टोरी छपने के बाद पाकिस्तान में जेहाद के लिए दुकान-दुकान पर एकत्र हो रहे चंदे की खबर भी बनायी तो उसको छापने से पहले नोएडा में शशिशेखर के ध्यानार्थ भेजी गयी। वहां से यह खबर आधी रात को ओके हुई। आधी रात को आयी यह खबर दूसरे दिन अंदर के पन्ने पर छपी, विज्ञापन के चलते पेज पर स्पेस संकट से खबर की दशा देखकर बहुत दुख पहुंचा। दूसरे दिन मीटिंग में पता चला कि अलीगढ़ से पुष्कर पाण्डेय भी जम्मू तबादला होकर आ रहे हैं। शाम तक पुष्कर पाण्डेय से संपादक ने परिचित कराते हुए काम समझाने और अपने ही घर में इनको भी एडजस्ट करने को कहा। रजाई-गद्ïदा के साथ दो बैग सामान भरकर आए पुष्कर पाण्डेय का सामान गांधीनगर भिजवाने के साथ रात में बैठकी का कार्यक्रम बना। पूर्वांचल की माटी से पले-बढ़े पुष्कर को मेरे बारे में जानकारी हो चुकी थी कि जम्मू पहुंच गया हूं। यहां आने के बाद परिवार को होने वाली तकलीफ की चर्चा जब वह सर्द रात में करने लगे तो मेरे साथ अनिमेष और योगेंद्र भी गमगीन होते हुए भी हौसला बढ़ाने के काम में जुट गए। ..माता रानी सब ठीक करेंगी, यह आश्वासन कई बार देने के बाद उनको किसी तरह सुलाया गया। दूसरे दिन सबेरे जब नींद खुली तो अनिमेष ने कहा भाई साहब यह तो यहां नहीं चल पाएंगे। मैने कहा कि घबड़ाओ नहीं इनको जमीं का जन्नत दिखाया जाएगा तो मन लग जाएगा। अलीगढ़ में क्राइम रिर्पोिर्टंग करने वाले पुष्कर को फिलहाल डेस्क की जिम्मेदारी सौंपी गयी। मेरी खबरों को पढ़ते हुए उनके मन में भी रिपोर्टिंग का कीड़ा कुलबुलाने लगा। मैने संपादक से बात करने की सलाह दी। रात को बात करी तो संपादक जी ने आफ बीट स्टोरी करने की छूट दे दी। अब पुष्कर भी यायावरी गैंग में शामिल हो गए थे। मैने कहा कल आपको ऐसी जगह ले चलूंगा, जहां आपका मन लगेगा..
क्रमश:
                              

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