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मंगलवार, 28 फ़रवरी 2012

दिग्गी राजा की जब हो गई बोलती बंद

दिग्गी राजा की जब हो गई बोलती बंद
लखनऊ। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव दिग्विजय सिंह के बोल के आगे सबके बोल बेकार हैं, अगर आप ऐसा सोचते हैं तो आपका नजरिया सोमवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दफ्तर में उनकी प्रेसवार्ता में जो कुछ हुआ, ...उसका हाल जानने के बाद बदल जाएगा।
चुनावी मौसम में पत्रकारों की जिस तरह संख्या बढ़ जाती है, उसी तरह आज टीवी चैनलों की तादाद में कई गुना इजाफा हो जाता है। बड़े नेताओं की प्रेसवार्ता का लाइव प्रसारण के लिए इलेक्ट्रानिक मीडिया के ओवी वैन के साथ कैमरों की भी भरमार रहती है। ऐसे माहौल के बीच आमतौर पर सभी दलों में प्रेसवार्ता होती है, लेकिन कांग्रेस के बड़े नेताओं का नखरे कुछ अलग रहते हैं। सोमवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव व प्रांतीय प्रभारी दिग्विजय सिंह की प्रेसवार्ता को कवर करने प्रिंट मीडिया के फोटोग्राफर भी दर्जन संख्या में उनके हाव-भाव को कैमरे में कैद करने के लिए पहुंचे थे। मीडिया रूम में आने के बाद दिग्विजय सिंह ने दो मिनट का समय प्रिंट फोटोग्राफरों को देते हुए बोले ‘अच्छा आप लोग अब चलिए’ एक बार उनकी आवाज जब पे्रस फोटोग्राफर नहीं ध्यान दिए तो फिर बोले ‘चलिए-चलिए’। चुनाव के मौसम में कपिल सिब्बल, सलमान खुर्शीद सहित कई बड़े नेताओं के साथ दिग्विजय सिंह के मुंह चलिए-चलिए का डायलॉग सुनने के बाद फोटोग्राफर उनके ऊपर भडक़ उठे। द हिंदू के वरिष्ठ फोटोजर्नलिस्ट सुबीर दा दिग्विजय सिंह को अंगुली दिखाते हुए बोले जब यह सलूक करना है तो प्रेसवार्ता में क्यों बुलाते हैं। दिग्विजय सिंह ने कहा मुझे कोई दिक्कत नहीं है इलेक्ट्रानिक मीडिया के फोटोग्राफरों को दिक्कत है। दिग्विजय सिंह अपनी बात में इलेक्ट्रानिक मीडिया के फोटोग्राफरों से हां में हां करवाने में जुट गए। खैर पांच मिनट तक प्रेस फोटोग्राफर और दिग्विजय के बीच इस मुद्ïदे को लेकर कहासुनी होती रही। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दो नेता जब फोटोग्राफरों को समझाने आए तो उनको डांट कर किनारे कर दिया गया। पांच मिनट तक कहासुनी के बाद प्रेस फोटोग्राफर वहां से चले गए। दिग्विजय सिंह को पूरे घटनाक्रम के दौरान ऐसा लगा जैसे उनकी बोलती बंद हो गई। दिग्विजय सिंह के चलिए-चलिए के अंदाज पर नाराजगी जाहिर करने वालों में सुबीर दा के साथ प्रमोद शर्मा, मो. अशफाक, मो. अतहर, रितेश यादव, सुशील सहाय सहित कई लोग थे।

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