रोमिंग जर्नलिस्ट

सोमवार, 15 अक्तूबर 2012

सात समंदर पार फंसे सैकड़ों हिन्दुस्तानी


दिनेश चंद्र मिश्र
लखनऊ। मर्चेंट नेवी में नौकरी दिलाने के नाम पर जाब जालसालों ने पूर्वांचल के सैकड़ों युवकों को सात समंदर पार भेजकर बंधक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर कर दिया है। मचेंट नेवी पर नौकरी दिलाने के नाम खाड़ी देशों में भेजों में गए अधिकांश युवा उन होटलों में बंधक बन गए है, जहां उनको नौकरी तक ठहरने के लिए कहा गया। पिछले कई महीने से ठहरे ऐसे युवा खाने-पीने को दाने-दाने के लिए मोहताज हो गए हैं। तीन से पांच लाख रुपए तक लेकर ऐसे युवाओं को इरान,सऊदी अरब सहित कई खाड़ी देशों में भेजा गया है। विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगे गए युवाओं के मां-बाप ने प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को खत भेजकर इस मामले में फौरी कार्रवाई करने की मांग की है।
श्री टाइम्स के इस खबरनवीस से सात समंदर पार नौकरी के नाम पर बंधक से बन गए कुछ युवाओं के मां-बाप से अपनी पीड़ा बखान की। इरान के एक होटल में तीन महीने तक रहने के बाद नौकरी न मिलने पर बिल न चुका पाने पर बंधक बन गए महाराजगंज जिले के मनकधरा गांव के सुजीत मिश्रा भी है। सुजीत के पिता गांव में किसानी करते हैं, अपनी खेती को बेचकर इन्होंने तीन लाख रुपए बनारस में रहने वाले जाब जालसाज शैलेंद्र सिंह को दिया। तीन लाख रुपए लेने के बाद मर्चेंट नेवी में नौकरी दिलाने के लिए पासपोर्ट और बीजा बनवाने के नाम पर एक लाख रूपया और लेने के बाद इसी साल जून में इरान भेज दिया। इरान में एक होटल में सुजीत मर्चेंट नेवी में नौकरी की आस रोजाना लगाए हैं, होटल का बिल एक लाख रुपए से ऊपर हो गया। भुगतान के लिए पैसा न होने पर होटल में बीजा-पासपोर्ट रखने के बाद से  लिया गया तो सुजीत बंधक बन गया है। होटल में ही उससे छोटे-मोटे काम कराने के साथ उससे घर वालों को फोन कराया गया। फोन पर एक लाख रुपए भेजने पर ही शैलेंद्र को रिहा करने की बात कही गयी। सुजीत अकेले ही नहीं इरान में बंधक बना है, बल्कि उसके साथ इलाहाबाद,बनारस,गाजीपुर,आजमगढ़ के कई दर्जन युवा है। इलाहाबाद के मुठ्ïठीगंज के रहने वाले रोशन भी है। रोशन के पिता परचून की दुकान करते हैं। वह भी बेटे को मर्चेंट नेवी में नौकरी के लिए तीन लाख रुपए बनारस के शैलेंद्र सिंह को दिया। बीजा-पासपोर्ट के लिए अलग से धन देने के बाद उसको भी इरान भेजा गया, आज वह भी बंधक बन गया है। आजमगढ़ के मोहम्मद रिजवान को भी इसी जालसाज ने नौकरी दिलाने के नाम पर खाड़ी देश भेजा, वहां उसको मर्चेंट नेवी में नौकरी की बजाए एक कंपनी में हेल्पर की नौकरी लगी। उसका बीजा-पासपोर्ट रखने के बाद उसको भी बंधक बना लिया गया है, उसकी सितंबर के आखिरी सप्ताह से तबियत खराब है। खून की उल्टी हो रही है लेकिन घर नहीं जाने दिया जा रहा है। उसका पासपोर्ट नंबर जी.७५०३९७३ और मेरा वीजा नंबर ४१०१२६७६२२ है। रिजवान की तरह कई भारतीयों के एडवांस विजन नामक कंपनी में बंधक बन गए हैं। मो. रिजवान के अब्बा मोहम्मद खालिद ने बताया कि रिजवान ने कंपनी के अधिकारियों से जब अपनी बीमारी के कारण भारत जाने के लिए पासपोर्ट मांगा तो उसे चोरी के केस में फंसा देने की धमकी दी जा रही हैै। रिजवान के साथ बिहार के पूर्वी चंपारण के रहने वाले तौफीक भी बंधक बने हैं।  मर्चेंट नेवी की नौकरी के नाम सात समंदर पार जाकर बंधक बन गए हिन्दुस्तानियों के परिजनों ने भारत सरकार को खत भेजकर कार्रवाई की मांग पिछले महीने की है। इनकी मांग पर कोई न कार्रवाई न होने पर ऐसे युवाओं के परिजनों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करके भारत सरकार से इस दिशा में ठोस कार्रवाई करने की मांग किए हैं।

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