रोमिंग जर्नलिस्ट

गुरुवार, 18 अक्तूबर 2012


चाचाओं का चक्रव्यूह तोड़ रहा सियासत का अभिमन्यु

दिनेश चंद्र मिश्र
लखनऊ । धरतीपुत्र मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक छत्रछाया में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री की अभी तक सबसे कम उम्र में जिम्मेदारी संभालने वाले अखिलेश यादव अब अपनी अलग धमक बनाने में जुट गए हैं। प्रदेश में सपा सरकार बनने के छह माह तक पार्टी के पुराने नेताओं के साथ बहुत कुछ सीखने के बाद अब अखिलेश यादव अपनी हनक बनाने के लिए पार्टी और सरकार के भीतर मौजूद चाचाओं का चक्रव्यूह अभिमन्यू की तरह तोडऩे में जुट गये हैं। चाचाओं का चक्रव्यूह तोडऩे के पीछे विपक्षी दलों के तमाम आरोपों का मुंहतोड़ जवाब देने के साथ अपनी राजनीति और प्रशासनिक कौशलता का लोहा बीस करोड़ की आबादी वाले सूबे के साथ देश को दिखाना है।

प्रदेश में समाजवादी पार्टी को बहुमत मिलने के बाद अखिलेया यादव को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपने से पहले पार्टी और परिवार के भीतरखाने में उपजा असंतोष सरकार बनने के बाद भी रह-रहकर विरोधाभासी बयानों के बहाने बाहर आता रहा है। सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों की बयानबाजी और मुख्यमंत्री के  रूख में भिन्नता के कारण विपक्षी दलों के निशाने पर अक्सर सरकार आती रही है। युवा मुख्यमंत्री के कामकाज को लेकर विपक्षी दलों की टीका-टिप्पणी को लेकर कई बार सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को मंत्रियों के साथ सपा कार्यकर्ताओं को नैतिकता का पाठ पढ़ाना पड़ा। सपा मुखिया द्वारा नैतिकता का सबक सुनने के बाद भी अमल में लाने में मंत्रियों द्वारा गंभीरता न दिखाने के कारण गोण्डा में सीएमओ को अगवा करने जैसी घटना सरकार के गले की हड्डी साबित हुई। राजस्व राज्यमंत्री विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह की दबंगई के पीछे सरकार मेें मुख्यमंत्री के चाचाओं की भूमिका में अपने को जगह-जगह दिखाने वाले वरिष्ठ मंत्रियों का शह माना जा रहा है। गोण्डा में सीएमओ के  साथ बदसलूकी के समय जिले में आला अधिकारियों की मौजूदगी न होना भी इस विवाद के बढऩे का अहम कारण रहा। सपा सरकार बनने के बाद प्रदेश के कई हिस्सों में हुई अप्रिय घटनाओं को लेकर भी सरकार के इकबाल पर असर पड़ा।
अखिलेश की अगुवाई में सरकार के कार्यकाल को आठ माह पूरा होने के बाद अब मुख्यमंत्री पार्टी और सरकार के भीतर मौजूद चाचाओं के चक्रव्यूह  को तोडक़र अपनी हनक बनाने की दिशा में काम करने लगे हैं। अखिलेश यादव का दो दिन पहले प्रदेश के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को कामकाज में बदलाव लाने का अल्टीमेटम पहला कदम  है। मुख्यमंत्री के साथ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे अखिलेश यादव ने ऐसे चाचाओं के चक्कर में ही सपा से बाहर निकाले गए युवजन सभा के अध्यक्ष संजय लाठर को दुबारा पार्टी में शामिल करने के साथ युवजन सभा के अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपना भी इसी रूप में देखा जा रहा है। सपा और सरकार में शामिल वरिष्ठ नेताओं की शिकायत पर मुलायम सिंह यादव ने संजय लाठर को पार्टी से बर्खास्त कर दिया था, बुधवार को सपा प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संजय को फिर वही पद सौंपकर संदेश दे दिया है, अब अखिलेश की ही चलेगी। सरकार के साथ पार्टी में अपनी मजबूत पकड़ बनाने की दिशा में अखिलेश यादव आगे क्या क्या करते हैं, यह देखने लायक होगा।

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