रोमिंग जर्नलिस्ट

सोमवार, 21 जनवरी 2013

शौचालय के आंकड़े दिखा रहे हैं शर्मनाक सच

दिनेश चंद्र मिश्र
लखनऊ। आजादी के बाद इंडिया भले ही शाइनिंग विज्ञापनों में करे लेकिन गांवों में बसे असल भारत में विकास की तस्वीर क्या है? इसको अगर हम उत्तर प्रदेश के ७५ जिलों में घरों में मौजूद शौचालय की संख्या पर नजर डालते हुए देखेंगे तो एक शर्मनाक सच दिखाई पड़ेगा। इस शर्मनाक सच के पीछे छिपा है गांव-देहात में होने वाले बलात्कार का कड़वा सच। उत्तर प्रदेश में पिछले तीन साल में हुए बलात्काल के आंकड़े इस बात के गवाह है कि रेप की घटनाएं सबसे ज्यादा उस ग्रामीण भारत में हुई, जहां मां-बहन हो या बेटी उन्हें शौच के लिए घर से बाहर जाना पड़ता है। घर में शौचालय न होने के कारण खेत-खलिहान में शौच जाने के दौरान ही मां,बहन और बेटियों के साथ वहशी दरिंदें, जिस तरह मुंह काला करते हैं, उस नजरिए प्रदेश के किसी भी जिले का मुंह साफ-सुथरा नहीं है।
प्रदेश के किस जिलें में कितने प्रतिशत घरों में शौचालय न होने के कारण महिलाओं के साथ बदसलूकी की घटनाएं आम बात है। आइए शौचालय के उन आंकड़ों को देखे जो प्रदेश में शर्मनाक सच को दिखा रहे हैं। सबसे पहले बात उस जिले की जहां की रहनुमाई संसद में केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की मुखिया सोनिया गांधी करती है। बात रायबरेली जिले की हो रही है, यहां के सिर्फ १८.३ प्रतिशत घरों में ही शौचालय है। अस्सी प्रतिशत से ज्यादा घरों की महिलाएं शौच के लिए खेत-खलिहान में जाती है। यहीं हाल केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र बाराबंकी का भी है १८.३ प्रतिशत घरों में ही शौचालय है। श्रावस्ती में सबसे कम १२ फीसदी घरों में ही शौचालय है तो गोंडा में १२.५ प्रतिशत, सिद्घार्थनगर में १२.७ प्रतिशत घरों में ही शौचालय है। प्रतापगढ़ मेें १४ फीसदी घरों में ही शौचालय है। संतकबीरनगर में १५ प्रतिशत घरों में शौचालय सुविधा है। बलरामपुर में १५ फीसदी, बहराइच में १५.७ प्रतिशत, बस्ती में १६.४ प्रतिशत,कौशांबी में १६.७,चित्रकूट में १६.५,सुलतानपुर में सिर्फ १६.२ प्रतिशत, कुशीनगर में १७ तथा संतरविदासनगर भदोही में १८.८ प्रतिशत,सीतापुर में १८.३ प्रतिशत, महाराजगंज में १८.८,अंबेडकरनगर में १८.६ प्रतिशत,एटा में १९.८ फीसदी व ललितपुर में १९.४ प्रतिशत घरों में ही शौचालय है। उत्तर प्रदेश के यह वह जिलें हैं, जिनके अस्सी फीसदी घरों की महिलाएं जाड़ा हो या बरसात शौच के लिए बाहर जाने को मजबूर है।
शौचालय के मामले में साठ फीसदी से ज्यादा घरों में जहां शौचालय है उन जिलों की संख्या उत्तर प्रदेश में एक दर्जन भी नहीं है। गाजियाबाद जिले में सबसे ज्यादा ८४.६ प्रतिशत घरों में जहां शौचालय है, वहीं मेरठ में ७४.१ प्रतिशत,गौतमबुद्घनर में ७७.७ प्रतिशत,मुजफ्फरनगर में ६६ प्रतिशत,बिजनौर में ६०.५ प्रतिशत,मुरादाबाद में ६३.२ प्रतिशत,रामपुर में ६६.२ प्रतिशत,बागपत में ६४.७,बरेली में ६२ प्रतिशत,लखनऊ में ६५.६ तो कानपुर में ६३.३ प्रतिशत घरों में शौचालय मौजूद है। तीस से साठ फीसदी के बीच जिन घरों में शौचालय मौजूद है, उनके नाम है वाराणसी, सहारनपुर, झांसी, जालौन, पीलीभीत, फर्रूंखाबाद, ज्योतिबाफूले नगर ,शाहजहांपुर,आगरा,फिरोजाबाद,बुलन्दशहर व मथुरा है। इन जिलों में भी आधे से ज्यादा घरों की महिलाओं को शौच के लिए बाहर जाना पड़ता है। साठ से सत्तर फीसदी घरों में जिन जिलों में शौचालय नहीं है, उनमें हरदोई,लखीमपुरखीरी,उन्नाव, फतेहपुर,बांदा,हमीरपुर,मैनपुरी,औरेया,महोबा,इटावा, कांशीरामनगर,बंदायू,कन्नौज,फैजाबाद,मऊ,गाजीपुर,बलिया,देवरिया,चंदौली,मिर्जापुर,सोनभद्र,इलाहाबाद का भी नाम शुमार है। घरों में शौचालय न होने की यह शर्मनाक तस्वीर शाइनिंग इंडिया के सबसे बड़े सूबे का शर्मनाक सच है।

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