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शुक्रवार, 24 मई 2013

सोनभद्र का हलक यूपी में सबसे ज्यादा सूखा


दिनेश चंद्र मिश्र
लखनऊ। गर्मी में तो वैसे सबका हलक चार कदम चलने के बाद सूख जाता है लेकिन सूबे के सोनभद्र जिले के ग्रामीण क्षेत्र में लोगों का हलक सबसे ज्यादा सूखा है। प्रदेश के दर्जनभर से ज्यादा जिलों के ग्रामीण इलाकों में आज भी एक चौथाई घरों में पानी नहीं मौजूद है। पानी की तलाश में इन लोगों को लंबा सफर करना पड़ता है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति सोनभद्र जिले की है। सोनांचल कहे जाने वाले इस इलाके ३३.७० प्रतिशत घरों में पानी का इंतजाम नहीं है। पानी के लिए इनको घर से दूर सरकारी हैंडपंप से लेकर कुंआ,नदी व तालाब का सहारा लेना पड़ता है। गर्मी में यहां भी पानी सूख जाता है तो लोगों को हलक में दो बंूद पानी के लिए लंबी जद्ïदोजहद करनी पड़ती है।
भारत सरकार द्वारा देश के सभी जिलों में कितने घरों पानी का इंतजाम मौजूद है? कितनों में नहीं है? यह जानने के लिए किये सर्वे से इस बात का खुलासा हुआ कि सोनभद्र के ग्रामीण इलाकों का हलक सबसे ज्यादा सूखा है। सोनभद्र देहात के ३३.७० प्रतिधत घरों में जहां पानी मौजूद नहीं है वहीं शहरी इलाकों में ११.६० प्रतिशत घर भी बेपानी है। सोनभद्र के बाद भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा का भी हलक काफी सूखा है। मथुरा के गांवों में भी ३३.३० प्रतिशत घरों में आज की तारीख में पानी नहीं पहुंचा है। मथुरा शहर में ऐसे घरों की संख्या ८.४० प्रतिशत है। मिर्जापुर के ग्रामाीण क्षेत्रों में भी पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची है। यहां के गांवों में २८.६० प्रतिशत घरों में पानी नहीं है। संत रविदासनगर भदोही में २३.२० प्रतिशत ग्रामीण घरों में रोजाना पानी की दरकार है।
बुन्देलखंड में भी पानी की किल्लत कम नहीं है। भगवान राम की नगरी चित्रकूट में भी पानी की किल्लत बहुत है। चित्रकूट के ग्रामीण इलाकों में २७.१० प्रतिशत घरों में आज भी पानी नहीं पहुंचा है। पानी के लिए यहां के ग्रामीणों का घाट-घाट का चक्कर लगाना पड़ता है। फहेतपुर में भी पानी की समस्या विकराल है। फतेहपुर के २६.८० प्रतिशत ग्रामीण घरों में पानी नहीं है। झांसी के ग्रामीण इलाकों में एक चौथाई घरों में पानी नहीं पहुंचा है। यहां रोजाना ग्रामीणों को पानी के लिए किसी लड़ाई से कम जद्ïदोजहद नहीं करनी पड़ती है। हमीरपुर में भी २१.८० प्रतिशत ग्रामीण इलाकों के घरों में पानी नहीं है। कानपुर देहात के देहात में भी पानी का रोना कम नहीं है। इस जिले के देहाती इलाकों में २४.८० प्रतिशत घरों में पानी नहीं मौजूद है। मुख्यमंत्री की पत्नी व सपा सांसद डिंपल यादव की राजनीतिक कर्मभूमि कन्नौज के गांव भी पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। कन्नौज के ग्रामीण इलाकों में २३.८० प्रतिशत घरों में पानी नहीं पहुंचा है। कौशांबी में भी पानी की समस्या बरकरार है। कौशांबी में २६.६० प्रतिशत ग्रामीण घरों में पानी नहीं मौजूद है।  संगमनगरी इलाहाबाद में भी पानी की समस्या कम नहीं है। इलाहाबाद के एक चौथाई गंवई घर बेपानी है। इलाहाबाद के २५.८० प्रतिशत घरों में पानी मौजूद नहीं है। चंदौली में भी पानी की समस्या जगजाहिर है। चंदौली में २३.३० प्रतिशत घरों में पानी नहीं पहुंचा है। रोजमर्रा की जरूरत का पानी लेने के लिए भी ग्रामीणों को घर से दूर जाना पड़ता है। बांदा में भी कमावेश यही स्थिति है। बांदा के २३ प्रतिशत ग्रामीणा घरों में बूंद-बूंद पानी के लिए लोगों को चक्कर लगाना पड़ता है।

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